क्या आप जानते है (तदनुसार ३००० ई.पू.) में ही सनातन धर्म ने विद्युत् उत्पादन के विषय में जानकारी प्राप्त कर ली थी. कैसे ?

अगस्त ऋषि का नाम तो आपने सुना ही होगा,  महर्षि अगस्त्य राजा दशरथ के राजगुरु थे। इनकी गणना सप्तर्षियों में की जाती है। महर्षि अगस्त्य को मं‍त्रदृष्टा ऋषि कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने तपस्या काल में उन मंत्रों की शक्ति को देखा था। ऋग्वेद के अनेक मंत्र इनके द्वारा दृष्ट हैं। महर्षि अगस्त्य ने ही ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 165 सूक्त से 191 तक के सूक्तों को बताया था . अगस्त्य के बारे में कहा जाता है कि एक बार इन्होंने अपनी मंत्र शक्ति से समुद्र का समूचा जल पी लिया था, विंध्याचल पर्वत को झुका दिया था और मणिमती नगरी के इल्वल तथा वातापी नामक दुष्ट दैत्यों की शक्ति को नष्ट कर दिया था। लेकिन क्या आपको पता है की उन्होंने विद्युत् उत्पादन के सूत्र लिखे है ? जी हा दोस्तों आज मैं अगस्त्य ऋषि के विषय में आप लोगो जो बताने जा रहा हु शायद ही आप को इस विषय में जानकारी होगी  जिन्होंने ‘अगस्त्य संहिता’ नामक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ की बहुत चर्चा होती है। इस ग्रंथ की प्राचीनता पर भी शोध हुए हैं और इसे सही पाया गया। आश्चर्यजनक रूप से इस ग्रंथ में विद्युत उत्पादन से संबंधित सूत्र मिलते हैं:-जय हो सनातन धर्म.

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